Posts

  गाँव तक जाने लगी रुस्वाइयाँ   हाथ में आने लगी तन्हाइयाँ | मौन छाया थक गयी शहनाइयाँ | + शोहरत सिमटी रही घर द्वार तक , गाँव तक जाने लगी रुस्वाइयाँ | + जिस्म पर जज़्बात के कर्जे कई , जान खुद करने लगी भरपाइयाँ | + यार जब साँसें थकी , दरिया थमा , थाह की बहाने लगी गहराइयाँ | + सोच में डूबी हुई अखबार में , शाम को लिखती  ' अलख' सच्चाइयाँ | +++++++++++++++++++++